Saturday, July 17, 2010

बदनसीबी

बदनसीबी  
खुदा के घर से निकली 
घर मेरा ही मिला उसे 
पनाह पाने को 

वो आई 
चबूतरे से ईंट गिरी 
चबूतरा नीचे आ गिरा 
छत तड़क गयी
दीवारें  ड़ेह गईं 
दफ्न मेरा घर हुआ
मैं मर गया
मेरी सांसें चलती रहीं 


बदनसीबी
सुमीर को छोड़ निकली 


शायद अभी नहीं

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